राजेश खन्ना की पुण्यतिथि: आखिरी शब्द थे ‘पैकअप टाइम हो गया’, सुपरस्टार की विदाई ने रुला दिया था पूरा देश

मनोरंजन : राजेश खन्ना… हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार, जिनकी एक मुस्कान पर लाखों दिल धड़कते थे। आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। 18 जुलाई 2012 की दोपहर जब उनके निधन की खबर सामने आई, तो मुंबई के कार्टर रोड स्थित ‘आशीर्वाद’ बंगले के बाहर हजारों प्रशंसकों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर किसी की आंखें नम थीं और पूरा माहौल गमगीन हो गया था।

बताया जाता है कि अंतिम समय में राजेश खन्ना के बेहद करीबी ने अमिताभ बच्चन को बताया कि उनके आखिरी शब्द थे, “टाइम हो गया है… पैकअप।” यह वही कलाकार था जिसने पूरी जिंदगी कैमरे और रोशनी के बीच बिताई और जाते-जाते भी जिंदगी को मानो एक फिल्म की तरह अलविदा कह गया।

राजेश खन्ना लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। खराब सेहत, कैंसर के इलाज और चलने-फिरने में दिक्कत के बावजूद उनका अभिनय के प्रति जुनून कम नहीं हुआ। डॉक्टरों की सलाह के विपरीत उन्होंने 2012 में एक विज्ञापन की शूटिंग पूरी की। भारी दर्द और दवाइयों के सहारे भी वह सेट पर पहुंचे, मेकअप कराया और कैमरे के सामने पूरी शिद्दत से अभिनय किया।

19 जुलाई 2012 को बारिश के बीच पूरे राजकीय सम्मान और हजारों प्रशंसकों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन के बाद ‘आशीर्वाद’ बंगले से प्रशंसकों द्वारा भेजे गए उपहारों से भरे करीब 65 सूटकेस मिलने की भी चर्चा रही, जो उनके प्रति लोगों के अपार प्रेम का प्रतीक थे।

पंजाब के अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना को बचपन में उनके रिश्तेदारों ने गोद लेकर पाला था। संघर्ष से लेकर सुपरस्टार बनने तक का उनका सफर भारतीय सिनेमा के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। उनकी फिल्म ‘आनंद’ का संवाद आज भी अमर है— “बाबूमोशाय, जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं।” और शायद इसी एक संवाद में राजेश खन्ना की पूरी जिंदगी समा जाती है।

Related posts